PATHALGAON
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22 Sep 2026
टेंडर हुआ, ठेका भी मिला, फिर भी सड़क की रूपरेखा पर संशय,लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, चौड़ाई से लेकर सीमांकन और अतिक्रमण तक स्थिति स्पष्ट नहीं
Rajesh Agrawal
Khabar Hatkar Verified Reporting Desk
सीएम की घोषणा और करोड़ों की स्वीकृति के बाद भी कागजों में दौड़ रही योजना, बदहाल सड़कों पर धूल और जानलेवा गड्ढों से जनता परेशान
पत्थलगांव। शहर की बदहाल सड़कों से उड़ती धूल और जानलेवा गड्ढों से राहत दिलाने के लिए विधायक गोमती साय एवं नागरिकों की मांग के बाद किलकिला प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्थलगांव की तीन प्रमुख सड़कों के नवीनीकरण की घोषणा की थी। इसके बाद शासन स्तर से करोड़ों रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति भी मिली और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेका भी आबंटित कर दिया गया। प्रकाशित विवरण के अनुसार तीन प्रमुख मार्गों के करीब 7.30 किलोमीटर हिस्से के उन्नयन के लिए 36.85 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। लेकिन घोषणा से लेकर स्वीकृति और टेंडर तक प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद जमीनी स्तर पर सड़क की वास्तविक रूपरेखा को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल लोक निर्माण विभाग की तैयारियों को लेकर खड़ा हो रहा है।
टेंडर हुआ, ठेका मिला, लेकिन सड़क कितनी चौड़ी होगी?
पूर्व में सड़क के मध्य से दोनों ओर 9-9 मीटर तक निर्माण किए जाने की बात सामने आई थी। अब सवाल यह है कि सड़क की अंतिम चौड़ाई क्या होगी? सीमांकन किस आधार पर किया जाएगा? सड़क की जद में आने वाले निर्माणों को लेकर विभाग की क्या योजना है?इन सवालों पर विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से नागरिकों में संशय बढ़ रहा है।
अतिक्रमण और मुआवजे पर भी स्थिति साफ नहीं-सड़क चौड़ीकरण के दौरान कई स्थानों पर अतिक्रमण और निजी निर्माण प्रभावित होने की संभावना है। ऐसे में कहां से सीमांकन होगा, किन हिस्सों से अतिक्रमण हटेगा और यदि वैध भूमि या निर्माण प्रभावित होते हैं तो मुआवजे की प्रक्रिया क्या होगी, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। जब सड़क निर्माण का ठेका तक आबंटित हो चुका है, तब इन मूलभूत तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं का स्पष्ट नहीं होना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
सीएम की घोषणा, करोड़ों की स्वीकृति... फिर भी लोक निर्माण विभाग की तैयारी अधूरी?
शहरवासियों का कहना है कि वर्षों से खराब सड़कों को लेकर विधायक गोमती साय और नागरिक लगातार आवाज उठाते रहे। इसी मांग के बाद मुख्यमंत्री ने सड़कों के कायाकल्प की घोषणा की और शासन ने भारी-भरकम राशि स्वीकृत की। ऐसे में जनता को उम्मीद थी कि अब जल्द ही निर्माण कार्य जमीन पर दिखाई देगा। लेकिन पत्थलगांव लोक निर्माण विभाग में बैठे अधिकारी-कर्मचारी यदि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप समयबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ाने के बजाय योजना को केवल कागजों में दौड़ाते रहे, तो करोड़ों रुपये की यह स्वीकृति भी शहर की बदहाल सड़कों की तस्वीर बदलने में कितनी कारगर होगी, यह बड़ा सवाल है।
परियोजना पर विभागीय उदासीनता का ग्रहण?
शहर की जनता का आरोप है कि महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को लेकर जिस स्तर की तैयारी और सक्रियता दिखनी चाहिए, वह नजर नहीं आ रही है। सड़क की चौड़ाई, सीमांकन, अतिक्रमण और निर्माण की जमीनी रूपरेखा पहले से तय किए बिना ठेका आबंटित होने के बाद भी यदि काम आगे नहीं बढ़ता है, तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद करोड़ों रुपये स्वीकृत होना शहर के लिए बड़ी सौगात है, लेकिन यदि विभागीय उदासीनता के कारण यह योजना फाइलों और कागजों में ही उलझी रही तो जनता के लिए यह सौगात अधूरी ही साबित होगी।
नागरिकों ने मांग की है कि लोक निर्माण विभाग तत्काल सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई, सीमांकन, अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया, प्रभावित संपत्तियों और निर्माण की समयसीमा को सार्वजनिक करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि टेंडर और ठेका आबंटन के बाद निर्माण कार्य जमीन पर कब शुरू होगा। आखिर सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रियान्वयन और करोड़ों रुपये की सरकारी राशि के सही उपयोग का भी है।
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