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PATHALGAON PATHALGAON
11 Sep 2026

10 दिन बीते, 84 पंचायतों में नहीं पहुंचा सितंबर का चावल; सस्ता राशन के लिए भटक रहे लाखों हितग्राही

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Rajesh Agrawal

Khabar Hatkar Verified Reporting Desk

10 दिन बीते, 84 पंचायतों में नहीं पहुंचा सितंबर का चावल; सस्ता राशन के लिए भटक रहे लाखों हितग्राही
राइस मिलों से समय पर मिलिंग का चावल जमा नहीं होने से बिगड़ी व्यवस्था, खाद्य विभाग ने मिलरों को ठहराया जिम्मेदार,फोर्टिफाइड चावल की कमी का मिलरों का दावा, सरपंच संघ ने लगाया मनमानी और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप,सीएम के गृह जिले में खाद्यान्न जैसी महत्वपूर्ण योजना की व्यवस्था पर उठे सवाल

पत्थलगांव। जनपद क्षेत्र की 84 ग्राम पंचायतों में सितंबर माह का सरकारी राशन 10 दिन बीत जाने के बाद भी कई हितग्राहियों तक नहीं पहुंच पाया है। सस्ता राशन योजना के तहत मिलने वाले चावल का इंतजार कर रहे हजारों-लाखों परिवार इन दिनों राशन दुकानों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। राशन भंडारण गोदाम में पर्याप्त मात्रा में चावल की उपलब्धता नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। खाद्य विभाग का कहना है कि राइस मिलों से मिलिंग का चावल समय पर जमा नहीं होने के कारण राशन की आपूर्ति प्रभावित हुई है। वहीं राइस मिलरों की ओर से फोर्टिफाइड चावल की उपलब्धता में कमी को चावल जमा नहीं होने की वजह बताया जा रहा है। इस खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी उन गरीब परिवारों को उठानी पड़ रही है, जिनके घर का राशन सरकारी खाद्यान्न पर निर्भर है।

मिलिंग के चावल की उपलब्धता पर सवाल-जानकारों के अनुसार धान का उठाव होने के बाद उसकी समय पर मिलिंग कर चावल भंडारण केंद्रों में जमा होना जरूरी है। लेकिन यदि मिलिंग के बाद चावल समय पर जमा नहीं होता है तो उसका सीधा असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर पड़ता है। वर्तमान स्थिति में भी यही होता दिखाई दे रहा है। हालांकि मिलिंग में देरी के वास्तविक कारणों और मिलों में उपलब्ध धान-चावल की स्थिति की पुष्टि भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


सरपंच संघ के अध्यक्ष रोशन प्रताप सिंह ने राइस मिलरों पर मनमानी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मिलरों द्वारा धान का उठाव करने के बाद समय पर मिलिंग का चावल जमा नहीं कराया जाता। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान स्थिति में राइस मिलों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मिलर धान की मिलिंग करने के बजाय उसे अन्यत्र खपाने में लगे रहते हैं। हालांकि इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।


अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल-राशन की आपूर्ति बाधित होने के बावजूद समस्या का समय रहते समाधान नहीं होने पर खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि राइस मिलरों पर प्रशासनिक स्तर से अपेक्षित दबाव नहीं बनाया जा रहा है। यही वजह है कि मिलिंग का चावल समय पर जमा नहीं हो पा रहा और उसका खामियाजा गरीब हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है।

सीएम के गृह जिले में खाद्यान्न व्यवस्था पर सवाल-जशपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के कारण लोगों को प्रशासनिक व्यवस्था में बेहतर कसावट की उम्मीद रहती है। ऐसे में खाद्यान्न जैसी सीधे गरीब परिवारों से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना में 10 दिन बाद भी राशन की नियमित आपूर्ति नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है, लेकिन विभागीय और मिलिंग व्यवस्था की खींचतान में हितग्राही ही परेशान हो रहे हैं।

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