PATHALGAON
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15 Oct 2026
*पत्थलगांव में ‘मातु की दुर्गा’ के मंगल पाठ की धूम,31 वर्षों की आस्था और भक्ति का दिखा संगम,झुंझुनू धाम की दादी के आशीर्वाद से गूंजा भक्तिमय दरबार, मोनिका अग्रवाल की सुमधुर वाणी ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर*
Rajesh Agrawal
Khabar Hatkar Verified Reporting Desk
झुंझुनू धाम की दादी के आशीर्वाद और माता रानी की कृपा के बीच आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में भक्तिमय माहौल देखने को मिला।
पत्थलगांव। आदर्श सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति ‘मातु की दुर्गा’ के तत्वावधान में आयोजित भव्य मंगल पाठ श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। झुंझुनू धाम की दादी के आशीर्वाद और माता रानी की कृपा के बीच आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर माता रानी की आराधना करते नजर आए। पिछले 31 वर्षों से निरंतर पूजा-अर्चना और सेवा के माध्यम से आस्था की परंपरा को आगे बढ़ा रही मातु की दुर्गा ने इस आयोजन के जरिए अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत किया। मंगल पाठ वाचिका मोनिका अग्रवाल ने अपनी मधुर, ओजपूर्ण और भावपूर्ण वाणी से मंगल पाठ की प्रस्तुति दी। उनकी भक्तिमय वाणी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और पूरा वातावरण माता रानी की भक्ति से सराबोर हो उठा। कार्यक्रम की मुख्य आयोजक नारायणी शर्मा के नेतृत्व और समर्पण से आयोजन को भव्य एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया गया।
*कार्यकारिणी के समर्पण से सफल हुआ आयोजन-:* मंगल पाठ को सफल बनाने में कार्यकारिणी के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यकारिणी में अध्यक्ष ललित अग्रवाल, उपाध्यक्ष मधु गुप्ता, सचिव रितु अग्रवाल (उमंग ज्वेलर्स) एवं सहसचिव विमल रोहिल्ला ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया। सभी के सामूहिक प्रयासों और समर्पण से धार्मिक कार्यक्रम गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ।
*31 वर्षों से कायम है आस्था का अटूट रिश्ता-:*
आयोजन के समापन पर समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं और मातृशक्ति के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने कहा कि भक्तों की सहभागिता और सहयोग ही ऐसे धार्मिक आयोजनों की वास्तविक शक्ति है। मातु की दुर्गा के साथ जुड़ी 31 वर्षों की आस्था, सेवा और परंपरा पत्थलगांव में धार्मिक एकजुटता का प्रतीक बनी हुई है। भव्य मंगल पाठ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता से धार्मिक परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनी रहती हैं।
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