PATHALGAON
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03 Nov 2026
साहित्य साधना के लिए राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ‘राज’ को कम्मू राष्ट्र गौरव सम्मान-2027
Rajesh Agrawal
Khabar Hatkar Verified Reporting Desk
संस्कारधानी रायगढ़ की माटी के गौरव, पूर्व प्राचार्य एवं साहित्यसेवी राज ‘राज’ की उपलब्धि से साहित्य जगत में हर्ष की लहर
रायगढ़/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी रायगढ़ की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक उर्वरा भूमि पर जन्मे श्री राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ‘राज’ शिक्षा, साहित्य, सामाजिक चेतना और रचनात्मक सृजन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुके हैं। स्वर्गीय श्रीमती सुशीला एवं स्वर्गीय श्री वाई.पी. पाण्डेय (पुलिस अधिकारी) के सुपुत्र राजेन्द्र कुमार पाण्डेय बचपन से ही मेधावी, प्रतिभाशाली एवं बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी रहे हैं। अध्ययन-अध्यापन, खेलकूद और साहित्यिक गतिविधियों में उनकी विशेष रुचि रही है। शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालीन सेवाएँ प्रदान करने के पश्चात वे प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए।
साहित्य के प्रति उनकी सहज अभिरुचि ने समय के साथ एक व्यापक आंदोलन का स्वरूप ग्रहण किया। कथा, कहानी, कविता एवं अन्य साहित्यिक विधाओं में लेखन करते हुए उन्होंने नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान करने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य से वर्ष 2021 में सोशल मीडिया के सशक्त माध्यम फेसबुक पर ‘राज श्री राष्ट्रीय साहित्य अकादमी’ की स्थापना की। उनका यह छोटा-सा प्रयास आज एक विशाल साहित्यिक परिवार का रूप ले चुका है। लगभग 20 हजार साहित्यकारों एवं रचनाकारों से जुड़ा यह आदर्श साहित्यिक समूह नवप्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, साहित्यिक प्रतिभाओं को सम्मानित करने तथा हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में निरंतर सक्रिय है।
अकादमी के माध्यम से काव्य गोष्ठियाँ, साहित्यिक प्रतियोगिताएँ, विशेष पर्वों पर रचनात्मक आयोजन, सम्मान समारोह एवं विविध साहित्यिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। विशेष बात यह है कि अकादमी साहित्यकारों को निःशुल्क मंच उपलब्ध कराते हुए उनकी प्रतिभा को पहचान और प्रोत्साहन देने का कार्य कर रही है। राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ‘राज’ का मानना है कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संस्कारित करने, मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त साधन है।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित
उनकी साहित्यिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक उपलब्धियों को देखते हुए देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। इनमें अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, जयपुर द्वारा प्रदत्त ‘मुंशी प्रेमचंद साहित्य सम्मान’, शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन, नेपाल द्वारा प्रदान की गई मानद उपाधि ‘मातृभाषा रत्न’, सहकार जगत साहित्यिक सम्मान, नेशनल रिसर्च एजुकेशन ट्रेनिंग सेंटर हेल्थ केयर, राजस्थान द्वारा प्रदत्त ‘डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन साहित्य शिक्षक रत्न सम्मान’ एवं ‘राष्ट्रीय सेवा रत्न सम्मान’ प्रमुख हैं।
इसके अतिरिक्त उन्हें विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा ‘राष्ट्रीय साहित्य रत्न’, ‘राष्ट्रीय काव्य शिरोमणि’ सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों एवं मानद उपाधियों से अलंकृत किया गया है। ये सम्मान उनके साहित्यिक अवदान, शिक्षकीय गरिमा, सामाजिक प्रतिबद्धता और निरंतर रचनात्मक सक्रियता के परिचायक हैं।
कम्मू राष्ट्र गौरव सम्मान-2027 के लिए चयनित
इसी गौरवशाली उपलब्धियों की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ने जा रही है। देश के प्रतिष्ठित कमलादेवी जनसेवा संस्थान, सीकर द्वारा श्री राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ‘राज’ का वर्ष 2027 के ‘कम्मू राष्ट्र गौरव सम्मान’ के लिए चयन किया गया है। यह सम्मान उनके बहुआयामी व्यक्तित्व, साहित्यिक साधना, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान तथा समाज के प्रति समर्पित सेवाभाव का महत्वपूर्ण सम्मान माना जा रहा है।
उनके इस चयन से छत्तीसगढ़ सहित देशभर के साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शुभचिंतकों एवं राज श्री राष्ट्रीय साहित्य अकादमी परिवार में हर्ष और उल्लास का वातावरण है। साहित्यिक जगत से जुड़े लोगों ने इसे न केवल राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ‘राज’ की व्यक्तिगत उपलब्धि, बल्कि छत्तीसगढ़ की साहित्यिक प्रतिभा का राष्ट्रीय स्तर पर गौरव बढ़ाने वाला प्रसंग बताया है।
इस अवसर पर श्री पाण्डेय ने सभी सम्मानदाता संस्थाओं, साहित्यकारों, सहयोगियों, शुभचिंतकों एवं अकादमी परिवार के सदस्यों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी का स्नेह, विश्वास और सहयोग ही उनकी साहित्यिक यात्रा की सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने भविष्य में भी साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और नवोदित रचनाकारों के प्रोत्साहन हेतु निरंतर समर्पित रहने का संकल्प व्यक्त किया।
निस्संदेह, राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ‘राज’ की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सच्ची साधना, सकारात्मक सोच और साहित्य के प्रति समर्पण से एक छोटा-सा प्रयास भी हजारों प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का विशाल मंच बन सकता है।
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