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30 Sep 2026
‘शुद्धि’ के 100 साल बाद भी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव जरूरी : प्रबल प्रताप जूदेव पुडुचेरी साहित्य उत्सव में घर वापसी अभियान के प्रमुख जूदेव बोले- स्वामी श्रद्धानंद ने जगाई थी सांस्कृतिक चेतना, जनजातीय क्षेत्रों में जागरण का अभियान जारी
Rajesh Agrawal
Khabar Hatkar Verified Reporting Desk
घर वापसी मिशन के प्रमुख जशपुर कुमार प्रबल प्रताप जूदेव ने घर वापसी को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से दोबारा जुड़ने की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि समाज के बीच काम करते हुए केवल धार्मिक विषयों पर ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, संस्कृति और स्थानीय परंपराओं को लेकर भी संवाद जरूरी है।
पत्थलगांव/पुडुचेरी- शुद्धि आंदोलन के 100 वर्ष पूरे होने के बीच पुडुचेरी साहित्य उत्सव में ‘शुद्धि आंदोलन के 100 वर्ष : क्या इतना ही पर्याप्त है?’ विषय पर देश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जागरण को लेकर महत्वपूर्ण विमर्श हुआ। सत्र में छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और घर वापसी अभियान के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि शुद्धि आंदोलन ने भारत की सांस्कृतिक चेतना और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भावना को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उनके साथ पत्रकार एवं लेखिका स्वाति गोयल शर्मा ने भी विषय पर विचार रखे। स्वामी श्रद्धानंद से शुरू हुई मुहिम, जशपुर से आगे बढ़ा संकल्प-प्रबल प्रताप जूदेव ने शुद्धि आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तक स्वामी श्रद्धानंद को याद करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने के लिए संगठित प्रयास किया। उन्होंने कहा कि शुद्धि आंदोलन को केवल इतिहास का एक अध्याय मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। इसके सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव को समझने की जरूरत है। उन्होंने अपने पिता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज के बीच सांस्कृतिक जागरण और घर वापसी का संकल्प उनके लिए निरंतर जारी रहने वाला अभियान है। जूदेव ने कहा कि जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में संवाद, जागरूकता और अपनी परंपराओं से जुड़ाव को मजबूत करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
‘घर वापसी’ सिर्फ वापसी नहीं, जड़ों से जुड़ने का संदेश -: घर वापसी मिशन के प्रमुख जशपुर कुमार प्रबल प्रताप जूदेव ने घर वापसी को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से दोबारा जुड़ने की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि समाज के बीच काम करते हुए केवल धार्मिक विषयों पर ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, संस्कृति और स्थानीय परंपराओं को लेकर भी संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की जनजातीय परंपराएं उसकी सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए विकास के साथ स्थानीय संस्कृति और पहचान के संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
धर्म स्वतंत्रता विधेयक को बताया महत्वपूर्ण कदम-:छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026 का उल्लेख करते हुए जूदेव ने कहा कि जबरन, प्रलोभन या धोखे से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए कानूनी व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने इसे राज्य में सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया। बस्तर का उल्लेख करते हुए जशपुर कुमार प्रबल प्रताप जूदेव ने कहा कि नक्सल हिंसा में कमी के बाद अब शांति और स्थिरता के वातावरण को जनजातीय विकास से जोड़ने की आवश्यकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, संचार और आर्थिक अवसरों के विस्तार के साथ बस्तर की स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखना भी जरूरी है।
साहित्य उत्सव के मंच से देश की सांस्कृतिक बहस-:पुडुचेरी साहित्य उत्सव को साहित्य और विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए जूदेव ने आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों पर भारत के इतिहास, संस्कृति, सामाजिक परिवर्तन और सांस्कृतिक पहचान जैसे विषयों पर खुला और तथ्याधारित संवाद होना जरूरी है।
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